अब तक प्रक्षेपित किये गये सभी उपग्रहों में से सबसे अधिक भारी उपग्रह जीसैट-11 को यूरोपियन स्पेस एजेंसी, फ्रेंच गुयाना से अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह एक संचार उपग्रह है जो देश को इंटरनेट द्वारा जोड़ने और उसकी गति को बढाने के लिये उपयोग किया जायेगा।
यह उपग्रह इस वर्ष के आरंभ में भेजा जाना चाहिये था, किंतु तकनीकी संदेहों के चलते इसे फ्रेंच गुयाना से बीते अप्रैल में वापस मंगा लिया गया था। यह निर्णय जीसैट-6ए की दुर्ग्याग्यपूर्ण असफलता के कारण लिया गया था, ताकि इस बार किसी प्रकार की कोई समस्या सामने ना आये।
इस उपग्रह के काम शुरु करने के बाद देश में इंटरनेट की गति में बहुत बड़ा अंतर आयेगा। जीसैट-11 देश के पूरे भौगोलिक क्षेत्र को कवर कर सकेगा। इसके पहले जितने भी उपग्रह थे, वह इतने सक्षम नही थे कि भारत जैसे बड़े देश के पूरे भौगोलिक क्षेत्र को कवर कर सके। इस उपग्रह में 40 ट्रांसपोंडर लगे हैं जो कू-बैंड और का-बैंड फ्रीक्वेंसी मे है, और इनके उपयोग द्वारा 14 गीगाबाइट प्रति सेकेंड तक डेटा को भेजा जा सकता है। अंतरिक्ष में यह उपग्रह लगभग 36,000 किमी ऊंचाई पर स्थापित होगा।
देश में डिजिटल क्रांति आने के साथ ही संचार माध्यमों के बढ़तते उपयोग और आवश्यकताओं के लिये यह उपग्रह एक वरदान होगा, इससे इंटरनेट की गुणवत्ता और गति दोनो में बढोत्तरी होगी तथा यह इंटरनेट सुविधा को सुदूर दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचाने में सहायक होगा।