अजीत डोभाल व्यूह रचनाः वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले का बिचौलिया मिशेल भारत लाया गया।


वीवीआईपी घोटाले में भूमिका निभाने वाले बिचौलिये मिशेल को भारत लाया गया है, सीबीआई ने इसके लिये राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के दिशा निर्देशों के अनुसार ‘ऑपरेशन युनिकॉर्न’ चलाया, जिसमे उल्लेखनीय सफलता मिली है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के शासन में वीवीआईपी हेलीकॉप्टर की खरीद में सरकारी पद का दुरुपयोग करने के समाचार आये थे, जिसमे हेलीकॉप्टर की उड़ान भरने की ऊंचाई 6,000 मीटर से घटा दी गयी थी, और इसको 4,500 मीटर कर दिया गया था ताकि विशेष कंपनी को लाभ मिल सके।

यूपीए शासनकाल में रक्षा मंत्रालय द्वारा ब्रिटेन की अगस्टा वेस्टलैंड इंटरनैशनल लिमिटेड को 55.62 करोड़ का ठेका दिया गया था, इस कंपनी में मिशेल काम करता था और वह भारतीय वायुसेना, और रक्षा मंत्रालय में अधिकारियों के साथ एक नेटवर्क बनाकर बिचौलिये की तरह कार्य करता था, इसके अतिरिक्त इसमे इटली की कंपनी फिनमैकेनिका के ऊपर भी आरोप हैं। अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए खरीदे जाने वाले हेलीकॉप्टर की उड़ने की क्षमता को 6,000 मीटर से घटाकर 4,500 मीटर कर दिया था, और इस निर्णय से अगस्टा वेस्टलैंड को लाभ मिल रहा था। इस घोटाले में उस समय के वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी और उनके परिवार के लोगों पर भी आरोप है।

मिशेल को भारत लाने के लिये बनी योजना को अजीत डोभाल के दिशा निर्देशों के अनुसार कार्यान्वित किया गया तथा सीबीआई में अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव भी इसमे शामिल थे। मिशेल को फरवरी 2017 में यूएई में हिरासत में लिया गया था। पिछले कुछ वर्षों में यूएई से भारत के राजनैतिक और रणनीतिक संबंधों में मजबूती आई है तथा इसी के कारण यह प्रत्यार्पण संभव हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा यूएई के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन जायद के बीच घनिष्ट संबंध हैं, यह एक प्रमुख कारण रहा कि यूएई ब्रिटिश नागरिक होने के बाद भी मिशेल को भारत को देने को तैयार हो गया।

भ्रष्टाचार के विरुद्ध किये जा रहे प्रयासों में यह प्रत्यार्पण एक बड़ी सफलता है, इसके पहले की सरकार में बोफोर्स घोटाले के आरोपियो को भारत नही लाया जा सका था, और भोपाल गैस कांड के अपराधी एंडरसन को देश से भागने दिया गया था, उन घटनाओं के विपरीत यह प्रत्यार्पण सरकार के भ्रष्टाचार के विरुद्ध किये जा रहे प्रयासों की गंभीरता को बताता है।

 


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