कूटनीतिक प्रयासों से दबाव में आया पाकिस्तान, हाफिज सईद के जमात उद दावा के मुख्यालय पर कब्जा किया।

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भारत द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों पर बमबारी के साथ ही किये गये कूटनीतिक प्रयासों से पाकिस्तानी सत्ता पर भारी दबाव है। इस कारण अपनी छवि को चमकाने तथा दबाव से मुक्ति पाने के लिये पाकिस्तान ने आज पंजाब की सरकार ने जमात उद दावा के मुख्यालय को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसके साथ ही जमात उद दावा के एक अन्य मुखौटा संगठन फलाह-ए-इंसानियत के कार्यालय को भी वहां की सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।

पाकिस्तान सरकार की ओर से कहा गया है कि उन्होंने 182 मदरसों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें अपने नियंत्रण मे लेने के साथ ही 100 से अधिक व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। अपने ऊपर किसी प्रकार के दबाव को ना दिखाने के प्रयासों में पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय यह भी कह रहा है कि ये कार्रवाई पहले से निर्धारित थी, और ऐसा किसी दबाव के कारण नही किया गया है।

पाकिस्तान में 2 सत्ता केंद्र होने के कारण आतंकियों के विरुद्ध कार्रवाई नही की जा पाती है। वहां उपस्थित विभिन्न इस्लामिक आतंकवादियों को सेना और आई.एस.आई. का संरक्षण प्राप्त है।

भारत के प्रति अपनी ईर्ष्या और द्वेष के कारण पाकिस्तान सरकार आतंकवादियों को कई दशकों से संरक्षण, प्रशिक्षण और अन्य सुविधायें प्राप्त कराती आई है। अपनी अर्थव्यवस्था के चरमराने और देश के निवासियों के लिये सुविधाओं का अभाव होने के बाद भी पाकिस्तानी सरकार भारत के प्रति अपनी ऊर्जा और धन दोनो झोंकती रही है। इस द्वेष के कारण आज पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है।

अपने आपको आर्थिक प्रतिबंधों से बचाने और ऋण लेने के लिये पाकिस्तान के लिये यह आवश्यक हो गया है कि वह आतंकियों पर कार्रवाई करे, और ऐसा करने पर उसे अपने ही देश में आतंकियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। आतंकियों के साथ ही ऋण ना मिलने की संभावना, और उसके ऊपर से भारत के कूटनीतिक प्रयासों ने पाकिस्तान को अलग थलग कर दिया है। विश्व के सभी प्रमुख देश और आर्थिक संगठन पाकिस्तान का साथ छोड़ चुके हैं, ऐसे में पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिति और आंतरिक आतंकियों से कैसे बचेगा, यह भविष्य के गर्भ मे है लेकिन पाकिस्तान की डगमगाती स्थिति वहां अराजकता की स्थिति को जन्म दे सकती है। वहां के विभिन्न हिस्सों जैसे बलोचिस्तान, पख्तूनिस्तान में अलग होने की मांग बढ रही है, ऐसे में पाकिस्तान में गृहयुद्ध होने की पूरी संभावना है, और आंतरिक, आर्थिक रूप से कमजोर पाकिस्तान ऐसे में और अधिक कमजोर और असहाय होगा।



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