मालदीव चीन के साथ हुए समझौते से बाहर निकलेगा।

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मालदीव में हुए सत्ता परिवर्तन का प्रभाव भारत और इस देश के बीच संबंधों को मजबूत करने लगा है। पिछली सरकार के अब्दुल्ला यामीन ने भारत के हितों को चोट पहुंचाने वाले चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया था, जो कि भारत के साथ साथ स्वयं मालदीव के हितों को भी नुकसान पहुंचाता। सत्ता परिवर्तन के बाद बनी नयी सरकार ने यह समझौता समाप्त करने की घोषणा की है, और कहा है कि यह एक तरफा समझौता था, चीन मालदीव से कोई सामान नही खरीदता था।
मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के मुखिया मुहम्मद नशीद ने कहा कि चीन और मालदीव के बीच में बहुत बड़ा व्यापारिक असंतुलन है, और इस परिस्थिति में कोई भी मुक्त व्यापार समझौते के बारे में नही सोच सकता। मालदीव के प्रेसिडेंट इब्राहिम मुहम्मद सालेह ने कहा था कि पिछली सरकार ने देश के खजाने को लूटा है और चीन से बहुत बड़ी मात्रा में ॠण लेने के कारण देश संकट से गुजर रहा है।
मालदीव की पिछली सरकार के प्रेसिडेंट अब्दुल्ला यामीन ने पिछले वर्ष चीन के दौरे में मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, और विपक्ष के विरोध के बाद भी उन्होंने इस प्रस्ताव को संसद से पारित करा लिया था, किंतु इस वर्ष सितंबर में हुए चुनाव में जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया तथा भारत के प्रति मित्रवत सोच रखने वाली सरकार को सत्ता सौंपी।
नयी सरकार के इस निर्णय से हिंद महासागर क्षेत्र में चीन का प्रभाव कम होगा। इसके पहले श्रीलंका में भी चीन के प्रति झुकाव रखने वाली सरकार का गठन किया गया था, जिसे वहां के उच्च न्यायालय ने निलंबित कर दिया था। वहां राष्ट्रपति द्वारा महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था, जो चीन के प्रति झुकाव रखते हैं। पढ़ें – श्रीलंका में राजपक्षे की नियुक्ति का निर्णय उच्चतम न्यायालय ने निलंबित किया।

चीन की भौगोलिक विस्तारवादी नीति धीरे धीरे व्यापार के द्वारा अपना प्रभाव बढाने और दूसरे देशों को ऋण देकर अपनी नीतियों को लागू कराने के लिये विवश कराने की ओर बढ रही है साथ ही चीन का प्रयास रहता है कि भारत के पड़ोसी देशों में भारत के प्रति शत्रुता का भाव रखने वाली सरकारें बनें। श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान और मालदीव में पिछली सरकारों का झुकाव चीन की नीतियों के प्रति रहा है और चीन ने उन्हें खुलकर ऋण दिया और उसकी आड़ में उन सरकारों को भारत के हित को चोट पहुंचाने वाले निर्णय लेने को विवश किया।


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