ऋण लेने के लिये पाकिस्तान आई.एम.एफ. के आगे झुकेगा।

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राजनैतिक अनिश्चितता और नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने के स्थान पर आतंक और आतंकवाद को पोषित करने का परिणाम पाकिस्तान के सामने आने लगा है। बढ़ता घाटा, विदेशी मुद्रा में कमी, और दिवालिया होने की कगार पर खड़ा पाकिस्तान अपने अर्थतंत्र की बदहाली को संभालने में नाकाम होता जा रहा है।

वित्त मंत्री असद उमर अब वित्तीय सहायता के लिये अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं, और इसके लिये अपने देश की संप्रभुता को गिरवी रखते हुए वह चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से जुड़े ऋण की जानकारी को शेयर करने के लिये तैयार हो गये हैं। हालांकि वह वर्तमान आर्थिक संकट के लिये चीन की सहायता से चलाई जा रही परियोजनाओं को दोष नही देते, किंतु सत्य यही है कि पाकिस्तान चीन के आर्थिक ऋण के बोझ के नीचे दब गया है, और उसे यहाँ से निकलने का कोई रास्ता नही सूझ रहा है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने इंडोनेशिया में क्रिस्टीन लगार्ड से आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिये बेल आउट पैकेज की मांग की थी, क्रिस्टीन लगार्ड अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक हैं।

आई.एम.एफ की एक टीम अगले महिने 7 नवंबर को पाकिस्तान आयेगी तथा इस दौरे में वह बेल आउट पैकेज के बारे में बातचीत होगी, आई.एम.एफ ने स्पष्ट कहा है कि यदि पाकिस्तान को बेल आउट पैकेज चाहिये तो उसे 50 अरब डॉलर वाले चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के प्रोजेक्ट से जुड़े ऋण सहित पाकिस्तान के सभी ऋणो की पूरी जानकारी देनी होगी। स्मरण रहे कि पाकिस्तान इस समय इतने अधिक गहरे आर्थिक संकट में फंसा है कि वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान खान को कार और भैंस तक बेचनी पड़ी हैं।


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