कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 84 के कांग्रेस-सिक्ख दंगों के लिये आजीवन कारावास


प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में हुए कांग्रेस – सिख दंगें में 34 वर्ष बाद एक बड़ा निर्णय आया है। कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार को दिल्ली के उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उच्च न्यायालय ने निचली कोर्ट के निर्णय को पलटते हुए दंगा भड़काने, और षडयंत्र रचने के मामले में सज्जन कुमार को दोषी ठहराया और उन्हें जीवन पर्यंत कारावास में रहने का निर्णय सुनाया। यह वही दंगा है जिसके लिये राजीव गांधी ने कहा था कि जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि “1947 में बंटवारे के समय कई लोगों की हत्या की गयी थी, इसके 37 साल बाद दिल्ली में ऐसी ही घटना घटी, और आरोपी राजनैतिक संरक्षण का लाभ लेकर सुनवाई से बच निकले।” न्यायाधीश एस. मुरलीधर तथा विनोद गोयल की बेंच ने यह निर्णय सुनाया है।

कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार पर 5 व्यक्तियों की हत्या का आरोप है, वर्ष 2005 में नानावटी कमीशन के कहने पर यह केस दोबारा से खोला गया था। 30 अप्रैल 2013 को सज्जन कुमार इस में बरी हो गये थे। मई 2013 में सीबीआई और पीड़ित परिवारों ने उच्च न्यायालय में अपील की थी। 1 मई को सिक्खों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए दिल्ली में मेट्रो ट्रैक को जाम कर दिया गया था, और 27 अक्तूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस निर्णय को सुरक्षित रख लिया था।

शिरोमणि अकाली दल के मनजिंदर सिंह सिरसा ने न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय का स्वागत किया तथा धन्यवाद दिया, उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर को मृत्यु दंड मिलने तक जारी रहेगा।

3 राज्यों में मिली चुनावी जीत के बाद कांग्रेस के लिये यह निर्णय एक झटका था, उनके अनेको नेता घोटालों, घपलों, आरोपों में घिरे हैं, जिस कारण कांग्रेस की छवि पहले ही खराब थी, उस छवि में कोर्ट के इस निर्णय से एक और धब्बा लग गया है। आशा है कि इस निर्णय से 1984 के दंगों के समय मारे गये सिक्खों के परिवार के जख्मों को कुछ राहत मिले।


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