यूरोपीय देशों ने चीन की BRI परियोजना का विरोध किया।

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चीन मे यूरोपियन यूनियन के 28 देशों में से 27 देशो के प्रतिनिधि राजदूतों ने चीन की BRI (Belt and Road Initiative) परियोजना को दुर्भावना पूर्ण बताते हुए इसकी निंदा की है। इन राजदूतों की ओर से बनाई गयी रिपोर्ट के में कहा गया है कि प्रस्तावित BRI से यूरोपियन यूनियन के बीच व्यापार के लिये उदार नियम बनाने के कार्य में नुकसान होगा, क्योंकि चीन की कंपनियों को सब्सिडी मिलती हैं और उनके पक्ष में स्थितियां मजबूत होंगी।

इस बीच भारतीय प्रधानमंत्री यूरोप की यात्रा पर हैं और वह देश को यूरोप के हितैषी और प्रमुख सहयोगी के तौर पर अपना पक्ष रख रहे हैं। बीते दिनों भारत ने भी देश की संप्रभुता और अखंडता का पक्ष रखते हुए इस परियोजना का विरोध किया था। BRI के प्रस्तावित 6 आर्थिक गलियारे 65 देशों में से होकर गुजरेंगे। पिछले वर्ष जब BRI सम्मेलन हुआ था तब यूरोपियन यूनियन ने चीन के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था।

भारत ने इस परियोजना के बारे में विरोध करते हुए कहा था कि इसमे चीन- पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से भारत की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान होगा, और कोई भी देश इस प्रकार की परियोजना को स्वीकार नही कर सकता जो उसकी संप्रभुता और अखंडता के हितों को नही देखता हो। देश का मानना है कि परस्पर संपर्क मार्गों द्वारा जुड़ने की कोशिशें वैश्विक स्वीकृति वाले नियमों, पारदर्शिता और समानता पर आधारित होनी चाहिये।



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